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भारत में गरीबी के अस्तित्त्व का एक और प्रमुख कारण देश के मौसम की दशाएं भी हैं। गैर-अनुकूल जलवायु लोगों की फर्मों में कार्य करने की क्षमता को कम करती है। बाढ़, अकाल, भूकंप और चक्रवात उत्पादन को बाधित करता है। जनसंख्या भी एक अन्य कारक है जो इस बुराई में भागीदारी करता है। जनसंख्या वृद्धि प्रति व्यक्ति आय को कम करती है। इस तरह जितना बड़ा परिवार का आकार उतनी ही कम प्रति व्यक्ति आय।भूमि और सम्पत्ति का असमान वितरण एक अन्य समस्या है जो समान रूप से किसानों के हाथों में भूमि की एकाग्रता को रोकता है। यह ध्यान देने देने योग्य बात है यद्यपि पिछले दो दशकों में अर्थव्यवस्था में प्रगति के कुछ स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं। ये प्रगति बहुत से क्षेत्रों और स्थानों पर असमान है। दिल्ली और गुजरात में, बिहार और उत्तर प्रदेश की तुलना में ऊंची वृद्धि दर है। लगभग आधी जनसंख्या के पास रहने के लिए उपयुक्त आवास, उचित सभ्य स्वच्छता व्यवस्था, गांवों में नजदीकी पानी का स्रोत और गांवों में माध्यमिक स्कूल और उचित सड़कों आदि की कमी है। यहां तक कि समाज के कुछ वर्ग जैसे दलितों को सरकार द्वारा नियुक्त संबंधित अधिकारियों द्वारा गरीबों की सूची में भी शामिल नहीं किया जाता। ये वे समूह हैं जो समाज में उपयुक्त नहीं समझे जाते।गरीबी पर चर्चा करते हुए भारत में गरीबी को कम करने के लिए सरकार के प्रयासों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। इसे सबसे पहले उल्लिखित करने की आवश्यकता है कि जो कुछ भी परिवर्तन गरीबी के अनुपात में सीमांत बूंदों के रूप में स्थान लेते हुए देखा गया है वह सभी लोगों को गरीबी के स्तर से ऊपर उठाने के उद्देश्य से बनाई गई सरकारी पहलों के निर्माण के कारण हुआ है। हालांकि, अभी इसे दूर करने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है क्योंकि इससे भ्रष्टाचार जुड़ा हुआ है।सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत गरीबों के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले खाद्य और गैर-खाद्य पदार्थ शामिल हैं। वितरित किए जाने वाले प्रमुख खाद्य पदार्थों में गेहूं, चावल, चीनी और कैरोसीन वितरण प्रणाली के लिए पूरे देश के सभी राज्यों में निश्चित की गई दुकानों के माध्यम से बांटे जाते हैं। लेकिन सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा दिया जाने वाला खाद्यान्न एक परिवार की उपभोग की आवश्कताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना के अन्तर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले प्रत्येक परिवार को हर
भारत में गरीबी के अस्तित्त्व का एक और प्रमुख कारण देश के मौसम की दशाएं भी हैं। गैर-अनुकूल जलवायु लोगों की फर्मों में कार्य करने की क्षमता को कम करती है। बाढ़, अकाल, भूकंप और चक्रवात उत्पादन को बाधित करता है। जनसंख्या भी एक अन्य कारक है जो इस बुराई में भागीदारी करता है। जनसंख्या वृद्धि प्रति व्यक्ति आय को कम करती है। इस तरह जितना बड़ा परिवार का आकार उतनी ही कम प्रति व्यक्ति आय।भूमि और सम्पत्ति का असमान वितरण एक अन्य समस्या है जो समान रूप से किसानों के हाथों में भूमि की एकाग्रता को रोकता है। यह ध्यान देने देने योग्य बात है यद्यपि पिछले दो दशकों में अर्थव्यवस्था में प्रगति के कुछ स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं। ये प्रगति बहुत से क्षेत्रों और स्थानों पर असमान है। दिल्ली और गुजरात में, बिहार और उत्तर प्रदेश की तुलना में ऊंची वृद्धि दर है। लगभग आधी जनसंख्या के पास रहने के लिए उपयुक्त आवास, उचित सभ्य स्वच्छता व्यवस्था, गांवों में नजदीकी पानी का स्रोत और गांवों में माध्यमिक स्कूल और उचित सड़कों आदि की कमी है। यहां तक कि समाज के कुछ वर्ग जैसे दलितों को सरकार द्वारा नियुक्त संबंधित अधिकारियों द्वारा गरीबों की सूची में भी शामिल नहीं किया जाता। ये वे समूह हैं जो समाज में उपयुक्त नहीं समझे जाते।गरीबी पर चर्चा करते हुए भारत में गरीबी को कम करने के लिए सरकार के प्रयासों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। इसे सबसे पहले उल्लिखित करने की आवश्यकता है कि जो कुछ भी परिवर्तन गरीबी के अनुपात में सीमांत बूंदों के रूप में स्थान लेते हुए देखा गया है वह सभी लोगों को गरीबी के स्तर से ऊपर उठाने के उद्देश्य से बनाई गई सरकारी पहलों के निर्माण के कारण हुआ है। हालांकि, अभी इसे दूर करने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है क्योंकि इससे भ्रष्टाचार जुड़ा हुआ है।सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत गरीबों के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले खाद्य और गैर-खाद्य पदार्थ शामिल हैं। वितरित किए जाने वाले प्रमुख खाद्य पदार्थों में गेहूं, चावल, चीनी और कैरोसीन वितरण प्रणाली के लिए पूरे देश के सभी राज्यों में निश्चित की गई दुकानों के माध्यम से बांटे जाते हैं। लेकिन सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा दिया जाने वाला खाद्यान्न एक परिवार की उपभोग की आवश्कताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना के अन्तर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले प्रत्येक परिवार को हर
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